सोमवार, 27 अक्टूबर 2014



सूरज


दिन भर जलकर शाम को प्यास बुझाता सूरज
खुद मर मरकर एक एक साँस चुकाता सूरज
पूनम की रातों का चंदा तो बस यूं ही यूं ही है
इश्क़ में खुद के पल पल चाँद लुटाता सूरज

थकन उदासी तनहाई ये सब रातों के जिगरी हैं
इक आँख में गुज़री हर एक रात भुलाता सूरज  

दिल के सर्द कोने में कुछ जमे हुए से किस्से हैं
इक सुकुन में लिपटी मीठी याद रुलाता सूरज

जयश्रीकर पन्त “मनु”

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