जाने क्या आया फूलों के ज़ी में
सूखे ठूंठ के ऊपर
टांग दी अपनी खुशबु
और चूमने लगे ज़मीं को.
पत्ता पत्ता होके
बिछोह में अपने साथी के
पड़ोस की पत्तियों ने भी उतार दिया चटख रंग
और ओढ़ लिए पीले मुरझाये से अंगोछे
एक एक बूँद निचोड़ ली नम हवाओं से
और फेंक के मारा रात के घुप्प अँधेरे में
अब सूखी हवाएं भागती रहती हैं बेतहाशा
पत्ते दौड़ पड़ते हैं उसे थामने को
दो मिनट को लेते हैं दम
फिर भाग पड़ते हैं।
ढेर लगा है टूटे ख्वाबों का
कच्चे अरमानों का
सब ज़मींदोज़ हो रहे हैं,
पत्ता पत्ता हो के
सूखे ठूंठ के ऊपर
टांग दी अपनी खुशबु
और चूमने लगे ज़मीं को.
पत्ता पत्ता होके
बिछोह में अपने साथी के
पड़ोस की पत्तियों ने भी उतार दिया चटख रंग
और ओढ़ लिए पीले मुरझाये से अंगोछे
एक एक बूँद निचोड़ ली नम हवाओं से
और फेंक के मारा रात के घुप्प अँधेरे में
अब सूखी हवाएं भागती रहती हैं बेतहाशा
पत्ते दौड़ पड़ते हैं उसे थामने को
दो मिनट को लेते हैं दम
फिर भाग पड़ते हैं।
ढेर लगा है टूटे ख्वाबों का
कच्चे अरमानों का
सब ज़मींदोज़ हो रहे हैं,
पत्ता पत्ता हो के
जयश्रीकर पंत 'मनु'
03/11/2015